ज़ुल्फ़ को ऐसे न बिखरा

ज़ुल्फ़ को ऐसे न बिखरा

” बंद कर खेल-तमाशा हमें नींद आती है,
अब तो सो जाने दे दुनिया हमें नींद आती है,

डूबते चाँद-सितारों ने कहा है हमसे,
तुम ज़रा जागते रहना हमें नींद आती है,

दिल की ख़्वाहिश कि तेरा रास्ता देखा जाए,
और आँखों का ये कहना हमें नींद आती है,

अपनी यादों से हमें अब तो रिहाई दे दे,
अब तो जंज़ीर न पहना हमें नींद आती है,

छाँव पाता है मुसाफ़िर तो ठहर जाता है,
ज़ुल्फ़ को ऐसे न बिखरा हमें नींद आती है”

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