यार की खातिर तो कांटे भी

अपनी जिंदगी के अलग असुल हैं,

यार की खातिर तो कांटे भी कबुल हैं,

हंस कर चल दु कांच के टुकड़ों पर भी,

अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं…!!!

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