बिखरी यादों को यूँ समेटा मैंने

बिखरी यादों को यूँ समेटा मैंने,
अपने चेहरे पे तेरा चेहरा लगाया मैंने ,

पहचान न ले आईना ए जिन्दगी ,
खुद को गमों का हिजाब पहनाया मैंने,

बिखर गई गमों की स्याही अल्फाज पर,
उसे तेरी यादों का बहाना बनाया मैंने,

दर्द जब बढ़ गया हद से ज्यादा,
चेहरे को हँसी से सजाया मैंने…!!!

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