उनको मेरे इन्तजार पे

उनको मेरे इन्तजार पे यकीन न था,

मेरी नज़रों में उन जैसा कोई हसी न था,

मेरे अश्क और लहू जुदा हो रहे थे मुझसे,

उनके सिवा कोई मेरा जा-नाशी भी तो न था…

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