ऊँगली मेरी तरफ उठी ज़माने की

ऊँगली मेरी तरफ उठी ज़माने की

शायरों की महफ़िल में बात चली एक दीवाने की,

दिन रात जलने वाले एक पागल परवाने की,

मैने सोचा कोई और होगा ये सरफिरा,

देखा तो ऊँगली मेरी तरफ उठी ज़माने की…!!

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