तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ

तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ

आ जाओ किसी रोज़ तुम तो तुम्हारी रूह मे उतर जाऊँ,

साथ रहूँ मैं तुम्हारे ना किसी और को नज़र आऊँ,

चाहकर भी मुझे कोई छू ना सके मुझे कोई इस तरह,

तुम कहो तो यूं तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ…

(534)

Share This Shayari With Your Friends