तुम्हारे-ही-खयालो-में-खोए

तुम्हारे-ही-खयालो-में-खोए

जब खामोश आँखो से बात होती है,
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुवात होती है,
तुम्हारे ही खयालो में खोए रहते है,
पता नही कब दिन कब रात होती है…!!!

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