तु बेदर्द हो गई जमाने से

तेरे दर्द पर रोता हूँ आज भी,

तु बेदर्द हो गई जमाने से,

क्या कमी रह गयी मेरी मोहब्बत में,

ये ज़िन्दगी बीत न जाये सुलझाने में…!!!

(1404)

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