riston ki dori

मत पुछ मेरे सबर की इन्तेहाँ

मत पुछ मेरे सबर की इन्तेहाँ

मत पुछ मेरे सबर की इन्तेहाँ कहाँ तक है, तू सितम करले तेरी ताक़त जहाँ तक है, बफा की उम्मीद होगी जिन्हें होगी, ये देखना है तू जालिम कहा तक…Read more
किस्मत से अपनी सबको शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों होती है, जो नहीं मिल सकती उसी से मोहब्बत क्यों होती है, कितने दर्द है रिश्तों में दिल की, फिर भी दिल को उसी…Read more