सूरज का ढल जाना नया साल हैं

आरम्भ का अंत हो जाना नया साल हैं,
गिनती का नंबर बदल जाना नया साल हैं,

वर्तमान का इतिहास बन जाना नया साल हैं,
उदय होते हुए सूरज का ढल जाना नया साल हैं,

खिल के फूल का डाल से उतर जाना नया साल हैं,
दे के जनम माँ का आँचल ममता से भर जाना नया साल है,

एक दर्द भूल कर सुख को पहचान जाना नया साल हैं…!!!

(780)

Share This Shayari With Your Friends