सजाया होगा

सजाया होगा

मेरी जान के गोरे हाथों को मेहंदी से सजाया होगा ,

बहुत गहरा चढा होगा मेहंदी का रंग

उस मेहंदी का जिसमें उसने मेरा नाम छुपाया होगा ,

रह रह के रो पढी होगी ,

जब – जब उसको ख्याल मेरा आया होगा ,

खुद को देखा होगा जब आइने में तो अक्स मेरा भी नज़र आया होगा ,

लग रही होगी बला की सुंदर वो आज ,

देखकर उसको चाँद भी शर्माया होगा ,

आज मेरी जान ने अपने मां – बाप की इज्जत को बचाया होगा ,

उसने बेटी होने का हर फर्ज निभाया होगा ,

मजबूर होगी वो सबसे ज्यादा , सोचता हूँ किस तरह उसने खुद को समझाया होगा ,

अपने हाथों से हमारे खतों को जलाया होगा ,

खुद को मजबूत बनाकर मर्यादाओं को मिटाया होगा ,

कैसे सभांला होगा , जब उसने फेरों में खुद को जलाया होगा

कैसे उसने आप को सजाया होगा !!

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