दिल है कोई सागर की रेत नही

रूठ जाओ कितना भी पर मना लेंगे,
दूर जाओ कितना भी बुला लेंगे,

दिल आखिर दिल है कोई सागर की रेत नही,
जो लिख के नाम आपका मिटा देंगे…!!!

(1949)

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