फिर भी क्यूँ वो हुए ना हमारे

फिर भी क्यूँ वो हुए ना हमारे

जिनकी राहों में हमने बिछाए थे सितारे,

उनसे कहते है हरपल आंसुओं के सहारे,

हो गए है सारे शिकवे कितने किनारे,

मगर फिर भी क्यूँ वो हुए ना हमारे…

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