पलकों के किनारे हमने भिगोये ही  नही

पलकों के किनारे हमने भिगोये ही नही

पलकों के किनारे हमने भिगोये ही नही,

वो सोचते है हम रोए ही नही,

वोह पुछते है ख्वाबों में किसे देखते हो,

हम है की उमर से सोए ही नही…!!!

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