नजर आओगे हम पुकारेंगे

आवारगी में हमने इसको भी हुनर जाना,
इकरारे वफ़ा करना फिर उससे मुकर जाना,

जब ख्वाब नहीं कोई क्या जिन्दगी का करना,
हर सुबह को जी उठना हर रात को मर जाना,

शव भर के ठिकानों को एक छत के सिवा क्या है,
क्या वक़्त पे घर जाना क्या देर से घर जाना,

जब भी नजर आओगे हम तुमको पुकारेंगे,
चाहो तो ठहर जाना चाहो तो गुजर जाना…!!!

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