नज़र से क्यूँ जलाते

नज़र से क्यूँ जलाते

नज़र से क्यूँ जलाते हो आग चाहत की,

जलाकर क्यूँ बुझाते हो आग चाहत की,

सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे,

हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की…

 

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