मुझे अपना बना गया

मुझे अपना बना गया

” अपनी नज़र से कोई, मुझे जगमगा गया,
महफ़िल में आज सब की, निगाहों में छा गया,
.
कल तक तो इस हुजूम में मेरा कोई न था,
लो आज हर कोई मुझे अपना बना गया,
.
आता नहीं था कोई परिन्दा भी आस-पास,
अब चाँद ख़ुद उतर के, मेरी छत पे आ गया,
.
जो दर्द मेरी जान पे रहता था रात-दिन,
वो दर्द मेरी ज़िन्दगी के काम आ गया,
.
हैरान हो के लोग मुझे पूछते हैं आज,
‘आज़ाद’ तुमको कौन, ये जीना सिखा गया”

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