मेरी ज़िन्दगी को

मेरी ज़िन्दगी को तमाशा बना दिया उसने,

भरी महफ़िल मैं तनहा कर दिया उसने,

ऐसी क्या थी नफ़रत उसको मेरे मासुम दिल से,

खुशिया चुरा कर गम थमा दिया उसने…!!

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