मेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता

मेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता

हर आदमी में वफा हो ऐसा हो नहीं सकता,
गुलशन का हरेक फूल खुशबू दे नहीं सकता

तुम मुझसे मुखातिब हो ऐसे क्यूं देखते हो,
क्या मेरे सिवा तुमको कुछ और नहीं दिखता,

मेरा दर्दो-बयां सुनकर ऐसे वो हंस पड़े,
जैसे रोने का उन्हें कभी मौका नहीं मिलता,

सब साथ चल पड़े थे मगर राह तो कई थे,
हर मोड़ पे बिछड़ा हुआ फिर साथ नहीं चलता….!!!

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