मेरे ख़्वाबों में चली आती है

ये कमबख्त तेरी यादें हमे बहुत तडपाती है,
चुप चाप ही ये मेरे ख़्वाबों में चली आती है,

सताती है हमें ये, हमें बहुत रुलाती भी है,
छू कर मेरी रूह को, अँधेरी राह में खो जाती है,

जब ढूँढते है उसको हम तेरी आहट से,
छेद कर मेरी चूडियों को ये फिर से छुप जाती है,

केसे बतलाऊ में तुमको इसकी कहानी सनम,
ये कभी रुलाती तो कभी हमको बहुत हँसाती है,

तुझसे ज्यादा करीब ये तेरी यादें रहती है,
जो मुझे हर पल तेरी शैतानी का किस्सा सुनाती है,

बन कर ये मेरी चाँदनी, मुझे राह दिखाती है,
और कभी दौड़ कर मुझे प्यारसे लिपट जाती है…!!!

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