महक उठी थी फिज़ा किसी के नाम से,

जीते थे कभी हम भी शान से,

महक उठी थी फिज़ा किसी के नाम से,

पर गुज़रे हैं हम कुछ ऐसे मुकाम से,

की नफ़रत सी हो गयी हे मोहब्बत के नाम से…!!!

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