मगर रो न सकी

मगर रो न सकी

लोग पूछते है क्यों सुर्ख है तुम्हारी आंखे,

हँस के कह देती हूँ रात को सो ना सकी,

लाख चाहूँ भी मगर यह कह ना सकूं,

रात को रोने की हसरत थी मगर रो न सकी…!!!

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