कोई भी मंज़र दिखाई दे

कोई भी मंज़र दिखाई दे

आँखों को चाहे कोई भी मंज़र दिखाई दे,

बस एक शख्स इस मै बराबर दिखाई दे,

वो जितनी भी मुझ से करले बेरुखी उतना,

हसीन पहले से बढकर दिखाई दे…

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