कितना अजीब अपनी ज़िन्दगी का सफ़र निकला

कितना अजीब अपनी ज़िन्दगी का सफ़र निकला,

सारे जहाँ का दर्द अपना मुक़द्दर निकला,

जिसके नाम अपनी ज़िन्दगी का हर लम्हा कर दिया,

अफ़सोस वही हमारी चाहत से बेख़बर निकला…!!!

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