कंगन भी ढीले हो गए

कंगन भी ढीले हो गए

इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए,

तेरे हाथों में तो ये कंगन भी ढीले हो गए,

फूल बेचारे अकेले रह गए है शाख पर,

गाँव की सब तितलियों के हाथ पीले हो गए..

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