कहीं दूर मुझे जाना है

दूर कहीं दूर मुझे जाना है,

ज़िन्दगी तूने ज़रा देर से मुझे पहचाना है,

इतना भटके है के मंजिल का पता याद नहीं,

रास्ते पूछ रहे हैं के कहाँ जाना है…

(1892)

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