मत पूछो ये मुझसे के कब याद आते हो

मत पूछो ये मुझसे के कब याद आते हो

मत पूछो ये मुझसे के कब याद आते हो,
जब जब साँसे चलती है बहुत याद आते हो,
नींद में पलकें होती है जब भी भारी,
बनके ख्वाब बार बार नज़र आते हो,
महफ़िल में शामिल होते है हम जब भी,
भीड़ की तन्हाइयों में हर बार नज़र आते हो,
जब भी सोचा के फासला रखूँ में तुमसे,
जिंदगी बन के साँसों में समां जाते हो,
खुद को तूफां बनाने की कोशिश तो की,
बन के साहिल अपनी आगोश में समा जाते हो,
चाहा न था मैने इस पहेली में उलझना,
हर उलझन काजवाब बन ऐ उभर आते हो,
सूरज की रोशनी, चंदा की चाँदनी,
आसमां को देखता हूँ में जब जब,
तुम्हारी कसम बहुत याद आते हो,
अब ना पूछना मुझसे के कब कब याद आते हो…!!!

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