चराग-ऐ-इश्क जलने की रात आयी है

चराग-ऐ-इश्क जलने की रात आयी है

चराग-ऐ-इश्क जलने की रात आयी है,

किसी को अपना बनाने की रात आयी है,

फलक का चाँद भी शर्मा के मुँह छुपायेगा,

नक़ाब रुख से उठाने की रात आयी है,

निगाह-ऐ-साक़ी से छलक रही है शराब,

पीओ की पिने – पिलाने की रात आयी है,

वो आज आये है महफ़िल में चाँदनी लेकर,

की रोशनी में नहाने की रात आयी है…!!!

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