सिर्फ इशारो में होती मोहब्बत

सिर्फ इशारो में होती मोहब्बत अगर,

इन लफ़ज़ों को खुबसुरती कौन देता,

बस पत्थर बन के रह जाता ताज महल,

अगर इश्क इसे अपनी पहचान न देता…!!!

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