हम टूट कर रोते हैं

हम टूट कर रोते हैं

बेताब से रहते हैं उसकी याद में अक्सर,
रात भर नहीं सोते हैं उसकी याद में अक्सर,

जिस्म में दर्द का बहाना सा बना कर,
हम टूट कर रोते हैं उसकी याद में अक्सर।

(504)

Share This Shayari With Your Friends