हम भी जिया करते थे

कभी यारों की महफ़िल में बैठ के हम भी पिया करते थे,

कभी यारों के यार बन के हम भी जिया करते थे,

ज़िन्दगी ने की बेवफाई वरना,

हम भी ज़िन्दगी से प्यार किया करते थे…

(462)

Share This Shayari With Your Friends