दिल न दुखे अपने स्वार्थ के लिए

स्वर्ग का सपना छोड़ दो नर्क का डर छोड़ दो ,

कौन जाने क्या पाप क्या पुण्य बस,

किसी का दिल न दुखे अपने स्वार्थ के लिए,

बाकी सब  कुदरत पर छोड़ दो….!!!

(2054)

Share This Shayari With Your Friends