दिल की बेचैनी तब भी थी और आज भी है

दिल की बेचैनी तब भी थी और आज भी है

गम का आलम तब भी था और आज भी है
सुकून की तलाश तब भी थी और आज भी है,

बेसबब ही आ जाता है हर बात पे रोना
दिल की बेचैनी तब भी थी और आज भी है,

तुमसे कोई उम्मीद नहीं थी पर जाने क्यों
तुमको पाने की चाहत तब भी थी और आज भी है,

तुझसे बिछडे सदियां बीत गई लेकिन
तेरी यादों से दिल बेचैन तब भी था और आज भी है,

महफिल में हम मिलते रहें अक्सर लोगों से
पर तेरी कमी का एहसास तब भी था और आज भी है…!!!

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