दिल भी आवारा था

दिल भी आवारा था

कागज की कश्ती थी पानी का किनारा था,

खेलने की मस्ती थी ये दिल भी आवारा था,

कहा आ गए हम इस समझदारी के दलदल में,

वो नादान बचपन भी कितना प्यार था…

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