तुम भी छोड कर चले गए हमे

तुम भी छोड कर चले गए हमे

फुरसत किसे है जख्मो को सराहने कि,
निगाहे बदल जाती है अपने बेगानो कि,

तुम भी छोड कर चले गए हमे,
अब तम्मना न रही किसी से दिल लगाने कि…!

(1802)

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