बिन तेरे क्या रखा है जीने में

बिन तेरे क्या रखा है जीने में

अब भी ताज़ा है ज़ख्म सीने में,

बिन तेरे क्या रखा है जीने में,

हम तो जिन्दा हैं तेरे साथ पाने को,
वरना देर कितनी लगती है ज़हर पिने में…

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