पहचान भुला देती है दुनिया

पहचान भुला देती है दुनिया

इज़हार-ऐ-मोहब्बत पे सज़ा देती है दुनिया,
मुँह मोड़ के गुजरो तो सज़ा देती है दुनिया,

दुनिया से कभी तुम भूल कर भी प्यार न करना,
परदे में मोहब्बत के धागे देती है दुनिया,

मतलब नही होता तो तवज्जो नही देती,
मतलब हो तो पलकों पे उठा लेती है दुनिया,

जिंदा रहने के परस्तर है सब लोग यहाँ पर,
मर जाओ तो नक्श सारे मिटा देती है दुनिया,

खुशियों में तो सब साथ चलते है यहाँ पर,
गम आते तो पहचान भुला देती है दुनिया…!!!

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