अश्क़ बहाना चाहता हूँ

अश्क़ बहाना चाहता हूँ

दर्द-ऐ-दिल की दावा चाहता हूँ,
तन्हाई में अश्क़ बहाना चाहता हूँ,

सुकून मिलता है ज़माने को,
ब महफ़िल में शायरी सुनाता हूँ,

होश जब आता है मुझे, ऐ खुदा,
खुद में बेहोश होना चाहता हूँ,

जिंदगी से तो मौत बेहतर है,
तुझे जिंदगी लौटना चाहता हूँ…!!!

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