अधूरी सी चाहत है इस दिल में

अधूरी सी चाहत है इस दिल में

आज एक धीमी सी आहट है इस दिल में,
शायद कोई अधूरी सी चाहत है इस दिल में,
क्या करूं में कहा जाऊं,
बड़ी खलबली सी है आज इस दिल में,
कोई अपना होता तो बिन कहे ही समझ लेता,
अब किस को बताऊं की क्या है इस दिल में?
भूले बेठे है वो लोग भी जिन्हें अपना समझता हूँ,
कभी मिले तो दिल चीर के दिखाऊ के क्या है इस दिल में…!!!

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