वादे पे उनके आज भी जी रहे है हम

बसाया था दिल में चाहत की बात थी,
वो बेवफ़ा निकले उनकी फितरत की बात थी,

वादे पे उनके आज भी जी रहे है हम,
हमें था इंतज़ार आदत की बात थी,

रुसवा वो कर गए हमें सब के सामने,
हम कुछ भी न कर सके शराफत की बात थी,

चाहा हम ने पाया की और ने उन्हें,
वो मिले न हमें क़िस्मत की बात थी,

हमारी दास्ताँ सुन के सारा जहाँ रोया,
सिर्फ तुम न रोये हिम्मत की बात थी…!!!

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